भारतीय महापुरुषों की दृष्टि में इस्लाम
स्वामी विवेकानन्द
ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो। इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए। उसको मारना उस पर दया करना है। जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है। इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है।
कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३
गुरु नानक देव जी
मुसलमान सैय्यद, शेख, मुगल, पठान आदि सभी बहुत बर्बर व् निर्दयी हो गए हैं। जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर और तरह तरह के अत्याचार दे कर मरवा दिया जाता था।
नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ८०
महर्षि दयानन्द सरस्वती
इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं। जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती। श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता, जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं। अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी, राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें, एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं। इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया, न कि इसको बढ़ाने के लिए। सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है।
सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१
महर्षि अरविन्द
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता। हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए। इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं। किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए। हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें। हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए, अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है।
ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६
सरदार वल्लभ भाई पटेल
मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था। मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं। मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है। मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए। मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं, क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी। जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है। वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो।
संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार
बाबा साहब भीम राव अंबेडकर
हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है। यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं। साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा। विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी। पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है। मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है। कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है, इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है। मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है। इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता। संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया। कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है। गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है। इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं। धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते। मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती। वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते।
प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय, खण्ड १५१
माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी
पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता, उनकी हत्या, लूट दंगे, आगजनी, बलात्कार, आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है, ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा। पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है। दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं। ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके। अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं। सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें। यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें।
बंच आफ थाट्स पहला आंतरिक खतरा मुसलमान पृष्ठ १७७-१८७
गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर
ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है। वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते। वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं। सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं। ;
- रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५, टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७, कालान्तर
मोहनदास करम चन्द्र गांधी
मेरा अपना अनुभव है कि मुसलमान कूर और हिन्दू कायर होते हैं मोपला और नोआखली के दंगों में मुसलमानों द्वारा की गयी असंख्य हिन्दुओं की हत्या, लूटपाट व् बलात्कार को देखकर अहिंसा नीति से मेरा विचार बदल रहा है।
गांधी जी की जीवनी, धनंजय कौर पृष्ठ ४०२ व मुस्लिम राजनीति श्री पुरूषोत्तम योग
लाला लाजपत राय
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है। मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते। क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान, मध्य एशिया अरब, मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें।
पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५
पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५
समर्थ गुरू राम दास जी
छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली। मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे। मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया।
- डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८
राजा राममोहन राय
मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं। और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है।
इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए, उनका वध किया, लूटा व उन्हें गुलाम बनाया।
वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७
श्रीमति ऐनी बेसेन्ट
मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं। हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे। मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं, हमारी मातृभूमि के लिए नहीं। यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का। स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा।
- कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५
स्वामी रामतीर्थ
अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत, अलगाववाद, पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है। मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है। गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया। लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया। उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया। उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया। क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है।
प्रिय मित्रों,
स्वामी दयानन्द सरस्वती से पूर्व ईसाई धर्म प्रचारकों द्वारा यह प्रचार किया जाता था की वेद गडरियों (भेड़ चराने वाले) के गीत हैं, जिनमें जातिवाद, छुआछूत, पाखंड, मूर्तिपूजा जैसी अनर्गल बातें लिखी है I स्वामी दयानन्द ने वेदों का अध्यन किया और ये बताया कि पश्चिमी इतिहासकार मैक्स्मुल्लर और भारतीय विद्वान चारवाक आदी के द्वारा किया गया वेदों का अर्थ, गलत ही नहीं बल्कि अनर्थ है I मैक्स्मुल्लर और चारवाक ने अल्प संस्कृत ज्ञान के कारण वेदों से जातिवाद, छुआछूत, पाखंड, मूर्तिपूजा तथा तेतीस करोड़ देवी देवता जैसे विचार पैदा कर दिए हैं I वेदों में तो क्या मनुस्मृति में भी जातिवाद या छुआछुत का कोई जिक्र नहीं है I आज बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों का बजूद इसमिथ्या प्रचार पर टिका है कि मनु जी ने जातिवाद या छुआछुत बनाया जो पूरी तरह गलत है I स्वामीजी ने सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक में वेदों, शास्त्रों, मनुस्मृति, महाभारत, रामायण आदी संस्कृत ग्रंथों के सही अर्थ करने का तरीका बताया I उन्होंने वेदों का और उपनिषदों का सही भाष्य भी किया I स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने तात्कालिक अनेक पाखंडी संस्कृत के विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित कर, उन्हें वेदों के सही अर्थ को स्वीकार करने पर विवश किया I स्वामी दयानन्द सरस्वती के वैदिक धर्म से प्रभावित हो भारत के असंख्य मुसलमान (जो पूर्व में मुगलों द्वारा जबर्दस्ती मुसलमान बनाये गए थे) पुनः हिंदू बनने को तैयार हो गए, लेकिन पाखंडियों ने उन्हें हिंदू धर्म में स्वीकार करने से मना कर दिया I राजस्थान के कुछ पाखंडियों ने स्वामीजी को भोजन में विष देकर उनकी हत्या करा दी I इसी काम को पूर्व के राज्यों बिहार, बंगाल आदी में स्वामी विवेकानंद जी ने किया I
स्वामी दयानन्द सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीयों के अपने धर्म और संस्कृति में खो रहे विश्वास को पुनर्जीवित किया I यदि ये लोग ऐसा नहीं करते तो आज भारत एक ईसाई बहुल देश बन चूका होताI स्वामी दयानन्द सरस्वती और स्वामी विवेकानंद जी को कोटि-कोटि प्रणाम I
माननीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवतजी शिव आराधना एवं शिवत्व प्राप्ति को मातृभूमि की सेवा के लिए आवश्यक बताते हैंI लेकिन शिवाराधना एवं शिवत्व प्राप्ति का मार्ग वह होना चाहिए, जो महर्षि दयानंद ने दिखाया हैI महर्षि दयानंद अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में कहते है की वेदों के अनुसार परमात्मा निराकार एवं नश्वर है, जिनको लौकिक कथाओ में व्यक्त नहीं किया जा सकता हैंI पुराणों में वर्णित भगवान शिव, ब्रह्मा, विष्णु, राम, कृष्ण आदि महापुरुष थे जिन्होंने समय समय पर मानवमात्र को धर्मानुसार आचरण का मार्ग दिखाया I अत: उनकी शिव की आराधना का मार्ग मात्र प्राणायाम एवं यौगिक समाधी ही है, जो आ़प अपने घर के किसी शांत कोने में बैठ कर सकते हैंI किसी मंदिर में जाकर आप घंटी बजाएं, तदुपरांत आप शिवलिंग को दूध बेलपत्र आदि चढायेंI इन क्रियाओं से आप न शिवजी को समझ पायेंगे, न ही शिवत्व प्राप्त कर सकेंगेI हाँ, आप इस भ्रम को जरूर पाले रहेंगे कि आप शिवभक्त हैं आप इसप्रकार शिवभक्ति के साथ निम्न कुमान्याताओं को भी बढावा देंगे, जो वेद विरुद्ध भी हैंI
१. शूद्रों को शिवाराधना अथवा मंदिर में प्रवेश वर्जित है इसप्रकार आप जातिवाद तथा छुआछूत को अनजाने में पोषित करेंगेI
२. महिलाओं को मासिक धर्म के दिनों में अथवा विधवाओं को शिवाराधना नहीं करनी चाहिये इस प्रकार आप महिलाओ का उत्पीडन के मार्ग अनजाने में प्रशस्त करेंगेI
३. शिवजी बेलपत्र तथा दूध से प्रसन्न होते हैI आप कितने भी दुष्कर्म करें, वेलपत्र आदि चढा कर शिवजी को प्रसन्न कर लेंगेI इस प्रकार आप सद्कृत्य के लिए प्रेरित नहीं होंगेI
आदि आदिI
ये एक खेद का विषय है कि संघ हिंदुओं का सबसे बड़ा संगठन है, किन्तु स्वयंसेवकों को पाखंड, मूर्तिपूजा, जातिवाद, महिला-उत्पीडन से मुक्त नहीं करा पा रहा हैंI हिन्दू धर्म को विश्व स्तरीय बनाने के लिए संघ को महर्षि दयानंद एवं सत्यार्थप्रकाश की शरण में जाना ही होगाI
अतः माननीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवतजी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रमोदीजी, भाजपा अध्यक्ष अमितशाह समेत सभी संघ के प्रत्येक पदाधिकारी को सर्वप्रथम सत्यार्थ प्रकाश पढ़ कर हिन्दू धर्म के सही वैदिक रूप को समझना होगा, तभी वे शिवजी अथवा निराकार ईश्वर से साक्षात्कार कर पायेंगे, उनकी आराधना कर शिवत्व को प्राप्त होंगेI इसके अतिरिक्त संघ को एवं हिन्दू धर्म के उत्थान का कोई दूसरा उपाय मुझे समझ नहीं आ रहा हैI
आज समय विज्ञान, पूंजीवाद एवं वैश्विकरण का है, अतः यदि आज हमें हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार करना है तो
१. इसे एक विश्वस्तरीय उत्पाद बनाना होगा अर्थात इसकी Quality (गुणवत्ता) विश्वस्वीकार्य (Globally acceptable) बनानी होगी हमारे प्रतियोगी धर्म इस्लाम तथा ईसाईयत में जातिवाद, कन्या भ्रूणहत्या, दहेज जैसी बुराइयाँ नहीं हैंI हमें इन बुराइयों को इसलिए भी छोडना होगा क्योंकि ये वेदोक्त नहीं हैI
२. हिन्दू (वैदिक) धर्म की (Marketing) मार्केटिंग करनी होगीI इसकी खूबियों को विश्व के अन्य धर्मावलम्बियों के समक्ष रखना होगाI घर घर जा कर वैदिक हिन्दू धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करना होगाI
मित्रों, आज आवश्यक है कि इस्लाम ईसाईयत के नाम पर जो खून बहाया जा रहा है वो समाप्त होI यदि हम अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा अरब देशों में यदि २०% लोगों को भी हिन्दू धर्ममें ला सके, तो यह अयोध्या में राममंदिर बनने से भी अधिक महत्वपूर्ण होगा साथ ही विश्व का कल्याण भी इसी में हैI ---- डॉ देवराज मिश्र
(Our purpose to write this blog is not to hurt feelings of any individual, but only to spread the truth, so that thinking of leaders of Hinduism may be corrected)
(हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, अपितु हिन्दू नेतृत्व की सोच को सही करना मात्र हैI)
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