Thursday, January 14, 2016

अकबरुद्दीन ओवैसी के जहरीले भाषण की समीक्षा

अकबरुद्दीन ओवैसी के जहरीले भाषण की समीक्षा

      मित्रो कुछ दिनों से फेसबुक व् अन्य ब्लोग्स पर हैदराबाद से मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीनMajlis-e-Ittehadul Muslimeen (MIM) के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के भाषण का वीडियो काफी चर्चा में है। मैंने भी उनका भाषण सुना और पहले ही सेकंड से आखिरी सेकंड तक वे अपने भाषण में केवल जहर उगलते रहे, निश्चित ही ये भाषण मर्यादा के विरुद्ध और साथ ही साथ हिन्दू विरोधी होने के साथ साथ राष्ट्रविरोधीभी है, आइये उसके बाद उनके भाषण की समीक्षा भी करते है।
      इस भाषण को सुनकर आप खुद समझ गये होंगे की ओवैसी साहब ने ना केवल हिन्दू धर्म के खिलाफ जहर उगला। बल्कि उन्होंने तो हर राष्ट्रविरोधीगतिविधि के पिछे मुसलमानों के ऊपर हो रहे अत्याचार को ही दोषी ठहरा दिया, तो ओवैसी साहब, आपने कहा की हिंदुस्तान अगर तू बाबरी मस्जिद की शहादत की होती, हमारे बच्चो के गालो पर छुरिया चलाई होती, हमारी बस्तियों को जलाया होता तो बम्बई के धमाके भी होते, और फिर ओवैसी साहब कहते है की हर एक्शन का रिएक्शन होता है।

      सबसे पहले देखते है की बाबरी मस्जिद का किस्सा क्या है। बाबरी मस्जिद जैसे की देश के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने प्रमाणित कर दिया है की एक मुस्लिम लुटेरे, बाबर ने सर्वप्रथम भारत पर आक्रमण करके अयोध्या में श्री राम मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई थी। अब ये बात खुद बाबर की जीवनी से यहाँ प्रमाणित होती है
      उपरोक्त लिंक से पता चलता है की बाबर ने खुद अपनी जीवनी में ये स्वीकार किया है की उसी ने हिन्दुओ के हजारो मंदिरों की तरह केवल राममंदिर तोडा । बल्कि लाखो हिन्दुओ औरतो के बलात्कार किये, बच्चो को मारा और निरपराध हिन्दू जनता को प्रताड़ित किया और अत्याचार करके मुसलमान बनाया। यहाँ पर बाबरी मस्जिद के साथ मुस्लिम शासको द्वारा निरपराध हिन्दू जनता पर किये गये अत्याचारों का भी वर्णन है। अत: किसने किसके धर्म स्थल शहीद किये और किसने किसके बच्चो पर छुरियां चलाई या बस्तियां जलाई, ये ओवैसी साहब ही जाने और वैसे भी हर एक्शन का रिएक्शन होता है तो जनाब ओवैसी जी, ये भी आपके किये गये एक्शन का ही रिएक्शन है।
      इसके बाद ओवैसी साहब खुद को सेक्युलर कह कर मुस्लिमपरस्त कहते है। ये शब्द उन पिलपिले हिन्दू नेताओं के मुह पर एक जोरदार तमाचा है जो वोट के लालच में मजारो पर जाते है, रोजा इफ्तियार करते है या मुसलमानों से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते है, ऐसे लोग किस मुह से खुद को सेक्युलर कहते है। वैसे भी जनाब ओवैसी ने सही कहा एक मुसलमान कभी सेक्युलर नहीं हो सकता क्युकी कुरान में इसके लिए ख़ास मनाही है। ओवैसी साहब तो सेकुलरो को बाबरी मस्जिद बनाने की बात कहते है पर क्या यही सेक्युलर कभी राम मंदिर की बात करते है।
इसके बाद तो मुम्बई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को बच्चा कहते है कि उसने दो सो भारतीयों की हत्या की और साथ ही इसकी मजम्मत भी करते है, कि वो तो पाकिस्तान से आया था, पर गुजरात में हजारो मुसलमानों को मारने वाले नरेन्द्र मोदी को फांसी क्यों नहीं दी। अब ओवैसी साहब गोधरा पर कुछ क्यों नहीं बोले, क्या गोधरा में जिन्दा जलाए गये 59 हिन्दू निर्दोष नहीं थे। और रही बात गुजरात दंगो की, तो ये भी एक्शन का रिएक्शन था।
इसके बाद इनकी सेक्युलर उलटी बंद नहीं हुई। ये तो साफ़ साफ़ कहते है की यदि आन्ध्र की तरह पुरे देश के 25 करोड़ मुसलमान एक हो जाए, तो मोदी जल्दी ही फांसी पर लटकता दिखाई देगा। ओवैसी जी, भारत में लोकतंत्र है और संवैधानिक तरीके से चुने गये प्रधानमंत्री अथवा तत्कालीन एक राज्य के मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस प्रकार के क्षोभजनक बयान केवल उस राज्य के लोगो का अपमान है, बल्कि भारत की लोकतान्त्रिक पद्दति का भी घोर अपमान है।
      मुसलमानों को भड़काते हुए ओवैसी साहब पुरे देश के मुसलमानों को एक होने की बात कहते हुए टाइगर मेनन के पक्ष में बोलते है और भारत की न्यायपालिका को दोष देते हुए मुसलमानों को नयन देने की बात कहते है। एस टी एस सी को दोष देते है कि उनके लिए तो बिल आता है पर मुसलमानों को उनका हक क्यों नहीं मिलता। ये तो देश के दलितों और पिछड़े हुओ का भी अपमान है जो वर्षो से पिछड़े हुए है और मुसलमानों को दलितों से पिछड़े हुआ बताता है। 
राष्ट्रीय मंच नेता आसाम में बांग्लादेशी घुसपैठियों  को शहीद कहते हुए
      असम हिंसा में भी हिन्दुओ को दोष देते हुए ये कहते है की वहां पर भी मुसलमानों को मारा और बंगलादेशी घुसपैठियों की वकालत करते है जिनके बारे में सुप्रेम कोर्ट भी एक्शन करने की बात कह चूका है। आज बंगलादेशी समस्या बहुत विकट हो चुकी है, सरकारी आंकड़ो में ये 3 लाख और गैर सरकारी ये 5 लाख का आंकड़ा है, हर रोज 6 हजार से अधिक बांग्लादेसी अवैध रूप से भारत में आकर उपद्रव मचाते है। जिन्हें ओवैसी साहब निर्दोष कहते है, ओवैसी साहब को शायद ये पता नहीं की अडवाणी जी भाग कर नहीं आये थे, ये तो भारत का बंटवारा था जिसके कारण उन्हें अपनी जमीन, घर बार, छोड़ कर भारत के एक हिस्से से सुरक्षित आना पड़ा। केवल अडवाणी जी ही नहीं, इस देश के पांच करोड़ लोगो जिनमे हिन्दू मुसलमान और सिख थे को अपना घर बार छोड़ कर इधर से उधर आना जाना पड़ा था। लगता है ओवैसी साहब को इतिहास का ज्ञान नहीं है इसलिए ऐसी घटिया बाते कर रहे है? ओवैसी शायद भूल गये है की यु पी और बिहार के मुसलमान भाग भाग कर पूर्वी पाकिस्तान गये थे और खुद इनके उस समय के निजाम साहब भाग गये, पाकिस्तान पहुँच गये। जब पटेल जी के कहने पर भारतीय सेना ने हैदराबाद पर सैनिक करवाई की थी, ऐसे में खुद को यही का कैसे बता सकते है ओवैसी साहब। वो तो गाँधी जी की थोथी सेकुलरता के कारण मुसलमानों को यहाँ सुरक्षित जगह मिली और वहां पाकिस्तान में आज भी हिन्दुओ पर अत्याचार हो रहे है.. ताज, लाल किले, क़ुतुब मीनार को साथ ले जाने वाले ओवैसी साहब भूल रहे है की ये भी हिन्दुओ के द्वारा निर्मित है मुसलमानों ने इस देश में एक ईंट भी नहीं लगाईं, वो मुसलमान क्या ऐसे भव्य शानदार ईमारत बनायेंगे।
शायद इसे देख कर ओवैसी जी सर पकड़ पर बैठ जाए http://keshav.jagranjunction.com/2012/08/05/7/
और ये भी देखे ताज महल का सच http://mamta.mywebdunia.com/2008/05/27/1211907360000.html
      अब अकबरुद्दीन साहब ने तो भारत की पुलिस और सेना को भी नामर्दों की फ़ौज कह डाला, और इस पर उनकी खुद की पार्टी मजलिस इत्तेहादुल मुसलमीन Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (MIM) क्या सोचती है आपको उसकी बानगी भर पेश करते है। 
Example of what MIM thinks about Indian Army
    चूँकि इस रैली में आपको अल्लाह हु अकबर कहने वाले बहुत से मुसलमानों की एक भीड़ भी दिख रही होगी। कुछ लोग कहते है की हर मुसलमान एक जैसा नहीं होता, अगर ये सच है तो इस रैली में इतनी बड़ी संख्या में इतने लोग क्यों ओवैसी के समर्थन में नारे लगा रहे है, ये तो केवल एक बानगी भर है। असल तस्वीर तो कुछ और है, असल में हर मुसलमान और हर मुस्लिम नेता केवल अपने ही मुसलमान भाइयो के लिए सोचता है। उसके अच्छा या बुरा होने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, ऐसे ही एक और नेता का सच हम आपको दिखाते है जो असम के बंगलादेशियो को शहीद कहता है।

      यहाँ पर भी रुकने के बाद ओवैसी हिन्दुओ को ललकारता हुआ कहता है की तुम १०० करोड़ हो हम 25 करोड़, हमसे ज्यादा हो , बस एक बार पुलिस हटा लो फिर पता चल जायेगा की कौन ज्यादा ताकतवर है। अब ओवैसी साहब अगर आपके इस्लाम में इतनी ही ताकत है तो पिछले हजार साल से आप भारत में जो गजवा हिन्द यानी हिंदुस्तान पर इस्लाम का झंडा फहराने के ख्वाब देख रहे है, उस पूरा करते करते आपके इस्लाम की कमर कैसे टूट गयी? ये वही गंगा का किनारा है जहा पर इस्लाम का जहाज उतरा और केवल हमने उसे डुबोया बल्कि पूरी शिद्दत के साथ इस्लाम की जड़ो को खोद डाला। भूल गये वो बाप्पा रावल, जिन्होंने तुर्क, अरबो को ऐसा पछाड़ा की पांच सौ साल तक भारत की तरफ नजर नहीं उठा सके और हार कर पंजाब से भारत में दाखिल होना पड़ा, पर दिल्ली से आगे नहीं बढ़ पाए। जब हजार साल में कुछ नहीं कर सके तो अब 15 मिनट में क्या कर लेंगे??? अरब के लुटेरे आये, तुर्की आये, अफगानी आये, इरानी आये और ऐसे भागे की दोबारा आये तो आप जैसे अरबी गुलाम किस खेत की मुली है??
वे श्री राम जिनके नाम से भारत के 100 करोड़ के हिन्दुओ की सुबह होती है। उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणी केवल श्री राम या हिन्दुओ का वरन भारत की संस्कृति सभ्यता का अपमान है। ओवैसी साहब तो उनके जन्म पर ही सवाल उठा देते है कि माता कौशल्या के हरियाणा का निवासी होने का कारण श्री राम का जन्म हरियाणा में हुआ था। क्योंकि हरियाणा में ऐसी परम्परा है की पहली संतान का जन्म उसके मायके में होता है, महाराज ओवैसी जी, हरियाणा का निवासी होने के कारण मैं स्वयम आपको बता दू कि ऐसी कोई रीत हमारे यहाँ नहीं है। अगर है तो प्रमाण दे, थोथी मनगढ़ंत बाते करे, प्रमाण तो बहुत सकते है
आगे तो ओवैसी साहब नयी ही कहानी गढ़ देते है कि जज खुद कहते है कि मंदिर हर रोज आगे बढ़ रहा है। आगे तो पता नहीं कितनी कहानियाँ जोड़ते है, यहाँ तक कि भारत के एक और राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा प्रयोग करते हुए कहते है कि हिंदुस्तान तू सुन ले, इन मुसलमानों के गुस्से को थमाने वाले का नाम अकबरुद्दीन ओवैसी है, अगर मैं नहीं रहूँगा तो तबाही और बर्बादी तेरा मुस्तकबिल(भविष्य) बन जायेगा। शुक्र है मेरे सामने ये माइक है, कल ये माइक् कुछ और बन गया, तो हिंदुस्तान की हजार साल की तारीख में उतना खून ख़राब नहीं हुआ होगा जितना अब होगा।अब ओवैसी साहब आपकी ताकत तो पिछली राम नवमी को दिख गयी थी, जब सिर्फ दो लाख हिन्दुओ के इकठ्ठा होने पर आपकी मस्जिदों के इमाम और काजी मस्जिदों पर ताले लगा लगा कर भाग उठे।
       अब आगे ये मुसलमानों के गरीब, बेघर व् बेरोजगार होने की बात करते है तो महाशय इसके लिए आपका इस्लाम आपके मुसलमान ही जिम्मेदार है। जिन मुसलमानों का पेशा लुट, चोरी, हत्या बलात्कार बन गया हो, जो मुस्लमान शिक्षा केवल जिहादी बनने के लिए प्राप्त करते है, जो मुसलमान केवल अपने मजहब के लोगो और अपने मजहब की सोचते है ऐसे स्वार्थी, मतलबी कौम के लोगो का कौन भला करना चाहेगा। इतनी बड़ी आबादी होते हुए भी मुसलमान अपने कुकर्मो के कारण इतना पीछडा हुआ है, दूसरा आप जैसे कट्टरपंथी इनकी बेवकूफी का जमकर फायदा उठाते है और अपनी नफरत की दूकान चलाते है।
      अब ये ओवैसी साहब मुझे अरबी बिमारी से ग्रसित लगते है जिसे चारो तरफ सिर्फ मुसलमान, इस्लाम, मस्जिद, मदरसे, उर्दू और अरबी दिखती है। जब इन्हें पूरी तरह से अरब की संस्कृति से इतना ही प्यार है इतनी ही मुहब्बत है तो अरब ही चले जाए। आखिर आप इस देश के है या अरब के?  इतनी गुलामी तो एक कुत्ता भी अपने मालिक कर लेते है पर आप जिस जमीं पर रहते है उसी के लिए वफादार नहीं उल्टा कहते है कि हम दो गज जमीं में दफ़न होते है, क्योंकि हमे मिटटी से प्यार है। जनाब आपको प्यार नहीं हर मिटटी में अपनी लाश के कीड़े दबाने की आदत है। हम तो जलते है और हमारी राख भी इस देश की मिटटी और गंगा में मिल कर उसे उर्वरक बनाती है । आप तो जिस जमीं में दफ़न होने है वहां पर तो रेगिस्तान बन कर जमीं बंजर हो जाति है उल्टा खुद की लाश को भी कीड़ो के हवाले कर देते है।

(इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी की भावनाओ को ठेस न पंहुचा कर अपितु सत्य को उजागर करना है। साभार https://hindurashtra.wordpress.com/2013/01/03/ and Saffron Hindurashra(रोहित कुमार)www.facebook.com/wearehmg)

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